फैटी लिवर एक गंभीर समस्या है जिसमें लिवर की कोशिकाओं यानि सेल्स में फैट्स जमा हो जाता है और इससे काफ़ी परेशानी हो सकती है। फैटी लिवर के बारे में अधिक विस्तार से बता रहे हैं डॉक्टर संजीव कुमार वर्मा, गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट। 

हमारे लिवर की कोशिकाओं को हिपैटोसाइट्स कहा जाता है और आमतौर पर इसमें फैट्स की मात्रा बहुत कम होती है। किन्हीं कारणों से जब इसमें वसा की मात्रा बढ़ जाती है तो इसे फैटी लिवर कहा जाता है। आजकल बच्चों में भी फैटी लिवर होने की समस्या बहुत ज्यादा देखी जा रही है क्योंकि उनमें मोटापा बढ़ रहा है जिसका कारण है जंक फूड और फास्ट फूड खाने का चलन। हालांकि सिर्फ़ ज्यादा खाने की वजह से ही फैटी लिवर की परेशानी नहीं होती बल्कि खाने की कमी या फिर भूखमरी की वजह से भी लिवर में फैट्स की मात्रा बढ़ सकती है।  

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फैटी लिवर के प्रकार (Types of fatty liver in Hindi)

फैटी लिवर मुख्यत: दो तरह के पाए जाते हैं जिनमें से एक बच्चों में पाया जाता है और दूसरा बड़ों में। बच्चों में फैटी लिवर होना ज्यादा हानिकारक है क्योंकि इससे उनके लिवर के पूरी तरह ख़राब होने की संभावना रहती है इसलिए बच्चों के खानपान पर बहुत ध्यान रखने की ज़रूरत है ताकि आगे जाकर उन्हें ये समस्या ना हो। बड़ी उम्र के लोगों में अमूमन मेटाबॉलिज़्म सिंड्रोम और इन्सुलिन रेज़िसटेन्स जो कि डायबिटीज़ की बीमारी के पहले की कंडीशन है, उनमें फैटी लिवर की दिक्कत देखी जाती है।  

फैटी लिवर के लक्षण (Symptoms of fatty liver in Hindi)

फैटी लिवर अधिक मोटापे के शिकार बच्चों के अलावा भूखमरी या फिर कमज़ोर बच्चों में भी देखने को मिलता है। मोटापे के कारण फैटी लिवर होने के लक्षण बच्चों में पता नहीं चल पाते लेकिन बच्चों के बढ़ते हुए वज़न के साथ साथ फैटी लिवर का पता लगाना ज़रूरी है ताकि उसका इलाज किया जा सके। भूखमरी के कारण फैटी लिवर होने के लक्षण पाए जाते हैं और उसी अनुसार उसका इलाज किया जाता है।  

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फैटी लिवर के कारण (Causes of fatty liver in Hindi)

भूखमरी में फैटी लिवर की समस्या होती है लेकिन आज के समय में भोजन का उपयोग और असामान्य भोजन लेना इसका मुख्य कारण है। जंक फूड और फास्ट फूड खाने की आदत से मोटापे के शिकार बच्चों में फैटी लिवर होते देखा जा रहा है। इसके अलावा दूसरी बीमारियों और लिवर से संबंधित रोग होने से भी फैटी लिवर की परेशानी होती है हालांकि इसकी संख्या कम है।  

फैटी लिवर का इलाज (Treatment of fatty liver in Hindi)

फैटी लिवर के इलाज के लिए बच्चे के खानपान और शारीरिक क्रियाओं पर ध्यान दिया जाता है। फैटी लिवर से ग्रसित बच्चे का वज़न घटाना इसके इलाज के लिए बेहद ज़रूरी होता है। ऐसे बच्चों का वज़न बहुत अधिक होता है और वे शारीरिक रूप से भागदौड़ और खेलकूद कम करते हैं इसलिए कभी कभी इसके इलाज में उनकी जीवनशैली को पूरी तरह बदलना पड़ता है। ऐसे बच्चों को बाहर खेलकूद करने के लिए प्रेरित करना चाहिए जिससे उनका वज़न कम हो। वज़न कम होने से फैटी लिवर की समस्या भी कम होती जाती है। इसके अलावा बच्चों को एंटी ऑक्सीडेंट दवाइयां और मल्टी विटामिन्स भी दिए जाते हैं। साथ साथ अगर ये किसी पैथोलॉजिकल कारण से हो रहा है तो उसका इलाज कराना चाहिए।  

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फैटी लिवर के जोख़िम (Risks of fatty liver in Hindi) 

फैटी लिवर होने पर लिवर की कोशिकाओं में धीरे धीरे फैट्स जमा होता जाता है जिससे वे कोशिकाएं ख़राब होने लगती हैं और आगे जाकर इससे लिवर सिरोसिस की समस्या हो सकती है। बड़ी उम्र के लोगों में यदि लिवर की परेशानी पायी जाती है तो इससे ये समझा जाता है कि उनके बचपन में फैटी लिवर का गंभीर स्तर रहा होगा और इसलिए लिवर ख़राब होकर लिवर सिरोसिस की तरफ़ बढ़ा है। इसलिए फैटी लिवर का बचपन में ही इलाज करना आवश्यक है।  

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फैटी लिवर की रोकथाम (Prevention of fatty liver in Hindi) 

फैटी लिवर की रोकथाम के लिए अच्छा भोजन करना, सही समय पर खाना, खेलकूद और शारीरिक क्रियाकलाप करना बहुत ज़रूरी है। बच्चों को संतुलित आहार दें जिसमें हरी पत्तेदार सब्ज़ियां और फल वगैरह शामिल हो। कोशिश करें कि बच्चों के टीवी और मोबाइल देखने का समय एक घंटे से ज्यादा ना हो और बच्चों को उनकी रूचि अनुसार बाहर खेलने कूदने के लिए ले जाएं।  

डिस्क्लेमर – फैटी लिवर के लक्षण, कारण, इलाज तथा रोकथाम पर लिखा गया यह लेख पूर्णत: डॉक्टर संजीव कुमार वर्मा, गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट द्वारा दिए गए साक्षात्कार पर आधारित है।  

Note: This information on Fatty Liver in Hindi, is based on an extensive interview with Dr Sanjeev Kumar Verma (Gastroenterologist) and is aimed at creating awareness. For medical advice, please consult your doctor.