कैसे होता है फेफड़ों में इंफेक्शन और कैसे रख सकते हैं हम इनका ख्याल, बता रहे हैं डॉक्टर अजय कुमार वर्मा, पल्मोनोलॉजिस्ट।  

जिंदा रहने के लिए हमें सांस लेना ज़रुरी है। हमारे रेस्पीरेटरी सिस्टम में हवा नाक से अंदर जाती है और फेफड़ों के अल्व्योली यानि वायु कोष्टक तक पहुंचती है। सांस लेने के दौरान हम ऑक्सीजन ही नहीं बल्कि दूसरी कई गैसों को भी अंदर खींच लेते हैं लेकिन अदंर जाने पर हमारे फेफड़े सिर्फ ऑक्सीजन को आगे भेजते हैं और दूसरी गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन को बाहर निकाल देते हैं। ये फेफड़े हवा को एक तरह से फिल्टर करने का काम करते हैं लेकिन जब हम प्रदूषित हवा जिसमें वायरस, बैक्ट्रिया या फंगस हो, सांस लेते हैं तो इससे फेफड़ों में इंफेक्शन हो जाता है। फेफड़ों का इंफेक्शन किसी को भी हो सकता है लेकिन जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है उन्हें इंफेक्शन का ख़तरा ज्यादा होता है। बच्चों, बुज़ुर्गों और दूसरी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों में भी फेफड़ों के संक्रमण का ख़तरा काफ़ी बढ़ जाता है।  

Lungs Infection

कितने तरह का होता है लंग्स इंफेक्शन? (what are the types of Lungs infection?) 

फेफड़ों के इंफेक्शन चार तरह के हो सकते हैं जिनमें वायरल, बैक्टीरियल, पैरासीटिक और फंगल इंफेक्शन शामिल है। वायरस की वजह से होने वाले इंफेक्शन को वायरल निमोनिया कहते हैं। आजकल कोविड 19 यानि कोरोना वायरस की वजह से लोगों के फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं, जिसे कोविड निमोनिया या वायरल निमोनिया कहा जाता है। वहीं बैक्टीरिया की वजह से फेफड़ों की झिल्ली यानि प्लूरा मेमब्रेन में इंफेक्शन हो जाता है। बैक्टीरिया की वजह से टी बी रोग हो जाता है। इसके अलावा फेफड़ों में फोड़ा बन जाता है और उसमें पस भर जाता है जिसे लंग्स एबसेस कहते हैं। वायरस और बैक्टीरिया के अलावा कई परजीवी भी होते हैं जैसे हेलमीन्स, स्केरिस जिसकी वजह से फेफड़ों पर असर पड़ता है। कई तरह के फंगस भी फेफड़ों को बीमार कर सकते हैं। आमतौर पर फ्लू, निमोनिया, ब्रोन्काइटिस और टीबी की बीमारी फेफड़ों के इंफेक्शन के तौर पर देखी जाती हैं।  

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क्या है फेफड़ों के इंफेक्शन का कारण? (What causes lungs infection?) 

बैक्टीरिया और वायरस सबसे ज्यादा फेफड़ों को संक्रमित करते हैं। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। बातचीत के दौरान या फिर छींकने और खांसने से बैक्टीरिया और वायरस हवा में चले जाते हैं और जब वह दूषित हवा किसी दूसरे व्यक्ति के अंदर जाती है, तो उसे भी संक्रमित कर देती है। फेफड़ों में इंफेक्शन का रिस्क तब और भी बढ़ जाता है जब मरीज़ धूम्रपान या शराब का सेवन करता है। इसके अलावा जब मरीज़ का इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो या फिर वह किसी बीमारी से पीड़ित हो जैसे डाइबीटीज़, एड्स, तो ऐसे लोगों में फेफड़ों के इंफेक्शन का ख़तरा काफ़ी बढ़ जाता है। साथ ही उन लोगों में भी संक्रमण हो जाता है जिनकी पिछले दिनों किसी तरह की सर्जरी हुई हो। छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों को भी इंफेक्शन का ख़तरा ज्यादा होता है। धूल-मिट्टी और कारखानों से निकलने वाला धुंआ भी इंफेक्शन की एक वजह है।  

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क्या है लक्षण और कैसे होती है जांच? (What are the symptoms and how it is diagnosed?) 

खांसी, छींक, ज़ुकाम, सांस फूलना, कफ़ होना, नाक से पानी आना वगैरह फेफड़ों में इंफेक्शन के लक्षण होते हैं। इसके अलावा मरीज़ को गले में दर्द, सीने में जकड़न और सिर दर्द भी हो सकता है। इसकी जांच करने से पहले डॉक्टर मरीज़ों के लक्षणों का पता लगाते हैं। जांच के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है और साथ ही कल्चर करके ये पता किया जाता है कि वायरस या बैक्टीरिया किस तरह का है। इसमें छाती का एक्स रे और सी टी स्कैन करके भी परेशानी का पता लगाया जाता है। ज़रुरत पड़ने पर ब्रोन्कोस्कोपी भी की जाती है जिसमें दूरबीन को शरीर के अंदर डालकर फेफड़ों की जांच की जाती है।  

कैसे होता है इलाज? (Treatment of lungs infection) 

फेफड़ों के इंफेक्शन का इलाज मरीज़ के लक्षणों के अनुसार किया जाता है। इसमें एंटी वायरल, एंटी फंगल या एंटी बायोटिक दवाइयां भी दी जाती हैं। लेकिन अगर हालत ज्यादा ख़राब हो तो ऐसे में मरीज़ को हॉस्पिटल में एडमिट किया जाता है। हॉस्पिटल में मरीज़ को ऑक्सीजन थेरेपी, नेब्यूलाइज़ेशन और वेंटीलेटर की ज़रूरत पड़ सकती है। क्योंकि फेफड़ों में इंफेक्शन की वजह से कई बीमारियां हो जाती हैं जैसे टी बी, लंग्स एबसेस या फिर निमोनिया, इसलिए इनका इलाज भी अलग अलग तरह से किया जाता है।

  

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क्या है जटिलताएं? (What are the complications?) 

अगर किसी व्यक्ति को पहले से फेफड़ों की बीमारी हो तो ऐसे में इंफेक्शन होने पर रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। मरीज़ को रेस्पीरेटरी फेल्योर और हार्ट फेल्योर का ख़तरा होता है। साथ ही फेफड़ों की झिल्ली में पानी या पस भर जाता है।   

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कैसे बचें फेफड़ों के इंफेक्शन से? (How to protect ourselves from lungs infection?) 

इससे बचाव के लिए आप बहुत कुछ कर सकते हैं। साफ़ हवा में सांस लें और श्वसन के व्यायाम करें। योग को महत्व दें, प्रदूषण से बचें, पौष्टिक भोजन करें, साफ़ पानी पिएं, भरपूर नींद लें और तनाव दूर रखें। धूम्रपान और शराब का सेवन ना करें। हाथों को साफ़ रखें और बार बार अपने चेहरे या आंखों को हाथों से ना छुएं। इसके साथ ही हर साल फ्लू का टीका भी लगवा लें।  

डिस्क्लेमर – फेफड़ों में इंफेक्शन के लक्षण, कारण, इलाज तथा बचाव पर लिखा गया यह लेख पूर्णत: डॉक्टर अजय कुमार वर्मा (पल्मोनोलॉजिस्ट) द्वारा दिए गए साक्षात्कार पर आधारित है।    

This information on Lungs Infection, in Hindi, is based on an extensive interview with Dr Ajay Kumar Verma (Pulmonologist) and is aimed at creating awareness. For medical advice, please consult your doctor.