त्वचा पर काले रंग के तिल से ख़ूबसूरती बढ़ जाती है लेकिन अगर यही तिल सफ़ेद रंग का हो, तो बीमारी बन जाती है जिसे सफ़ेद दाग़ कहते हैं। इस बीमारी में त्वचा का रंग सफ़ेद हो जाता है। कैसे होता है सफ़ेद दाग़ और क्या है इसका इलाज जानिए डॉक्टर देवेश सिंह, त्वचा विशेषज्ञ से।  

सफ़ेद दाग़ त्वचा की एक बीमारी है जिसमें त्वचा का रंग बिल्कुल सफ़ेद हो जाता है। ये बीमारी कुछ अंगों से शुरू होकर धीरे धीरे पूरे शरीर में फैल जाती है। इस बीमारी को मेडिकल भाषा में विटिलिगो कहा जाता है। दरअसल सफ़ेद दाग़ की वजह है त्वचा में मेलानिन का घटना। हमारी त्वचा में मेलानिन नाम का एक तत्व होता है जो हमें रंग प्रदान करता है और जब किसी वजह से यह मेलानिन ना बने या घटने लगे, तो त्वचा सफ़ेद होनी शुरू हो जाती है। सफ़ेद दाग़ एक ऐसी बीमारी जिसमें ना सिर्फ़ त्वचा का रंग बदलता है बल्कि इसके मरीज़ों को बहुत सी सामाजिक परेशानियों और भ्रांतियों का भी सामना करना पड़ता है।  

Vitiligo

कितने तरह का होता है सफ़ेद दाग़? (How many types of vitiligo are there in Hindi)

सफ़ेद दाग़ कई तरह का होता है जैसे शरीर के किसी एक हिस्से पर अगर दाग़ हो तो ये सेगमेंटल विटिलिगो (Segmental vitiligo) कहलाता है। फेशियल विटिलिगो (Facial vitiligo) में चेहरे का कोई भाग प्रभावित होता है जैसे होंठ और ठुड्डी। यही दाग़ अगर उंगलियों के नाखूनों के साथ साथ होठों पर भी हो तो इसे लिपटिप विटिलिगो (Lip-tip vitiligo) कहते हैं। कभी कभी इसकी शुरूआत छोटे धब्बों से होती है और ये धब्बे धीरे धीरे आपस में जुड़कर आकार बढ़ा लेते हैं जिसे जेनरालाइज़्ड विटिलिगो (Generalized vitiligo) के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा सिर की त्वचा में भी सफ़ेदी आ जाती है जिससे बाल सफ़ेद हो जाते हैं इसलिए इसे स्कैल्प विटिलिगो (Scalp vitiligo) कहते हैं।  

क्या हैं इसके लक्षण? (What are its symptoms in Hindi)

इसके लक्षण को साफ़ तौर पर पहचाना जा सकता है क्योंकि इसमें किसी एक हिस्से की त्वचा का रंग आसपास की त्वचा के मुकाबले हल्का होने लगता है। पहले प्रभावित हिस्से का रंग हल्का होता है फिर सफ़ेदी आने लगती है और आख़िर में वो हिस्सा चौक (Chalk) की तरह सफ़ेद हो जाता है। इसलिए अगर त्वचा के किसी हिस्से में रंग में बदलाव आता है तो ये विटिलिगो का लक्षण हो सकता है।  

Vitiligo

क्या है इस बीमारी की वजह? (Causes of vitiligo in Hindi) 

आमतौर पर विटिलिगो होने की दो वजह पायी जाती है। पहला – केमिकल के ज्यादा इस्तेमाल करने या फिर उनके संपर्क में आने वाले लोगों में यह बीमारी देखी जाती है। आजकल लोग प्लास्टिक, रैक्सीन और रबर वगैरह से बनी चीज़ों का बहुत उपयोग करते हैं। रिसर्च में ये पाया गया है कि केमिकल के इस्तेमाल से विटिलिगो होने का ख़तरा होता है। वहीं दूसरी वजह की बात करें तो ये ऑटो इम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disorder) की वजह से भी होता है। ऑटो इम्यून डिसऑर्डर में व्यक्ति का शरीर ही ख़ुद अपने ख़िलाफ़ काम करने लगता है। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि ये एक तरह का डिसऑर्डर होता है जिसमें शरीर खुद ही कुछ इस तरह से काम करने लगता है जिससे ये बीमारी हो जाती है। कुछ मामलों में ये जेनेटिक कारणों से होता है यानि अगर परिवार में किसी को सफ़ेद दाग़ रहा हो तो ये बीमारी अगली पीढ़ी में भी जा सकती है। 

hair color

क्या है सफ़ेद दाग़ से बचने का उपाय? (How vitiligo can be prevented in Hindi) 

लंबे वक्त तक किसी भी तरह के केमिकल के संपर्क में रहने से बचें जैसे प्लास्टिक, रबर, रैक्सीन वगैरह। इसके अलावा बालों को रंगने वाले डाई, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स वगैरह भी केमिकल के बने होते हैं जिसके इस्तेमाल से सफ़ेद दाग़ हो सकता है। कई लोग त्वचा पर पत्तों, फूलों, फलों और दूसरी चीज़ों से बने पेस्ट और पैक बनाकर लगाते हैं। लेकिन अगर इस्तेमाल में लायी जा रही इन चीज़ों में केमिकल या यूरिया का छिड़काव हुआ हो, तो इससे नुकसान होता है और बीमारी भी हो सकती है।  

क्या है इसका इलाज? (Treatment of vitiligo in Hindi) 

बाकी रोगों की तरह विटिलिगो का भी पूरा इलाज मौजूद है जिसमें सर्जरी, फोटो थेरेपी, लेज़र और दवाईयों से इलाज किया जाता है। इसके इलाज के लिए सूरज की रौशनी बहुत फ़ायदा पहुंचाती है क्योंकि धूप से त्वचा में मेलानिन बनने लगता है इसलिए इसके मरीज़ों को लंबे समय तक धूप में रहने की सलाह दी जाती है। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि अगर इससे मरीज़ की त्वचा में किसी तरह के दाने निकल जाएं या फिर त्वचा लाल हो जाए तो ऐसे में धूप में नहीं जाना चाहिए। यदि मरीज़ को किसी तरह की परेशानी नहीं होती है तो उन्हें धूप में ज्यादा वक्त तक रहना चाहिए। दिन के ग्यारह बजे से लेकर तीन बजे तक की धूप में सिर्फ़ 15 या 20 मिनट तक भी रहा जाए तो ये काफ़ी होता है। साथ ही लंबे वक्त तक किसी तरह के केमिकल के संपर्क से बचें।  

Vitiligo

विटिलिगो की जटिलताएं (Complications of vitiligo in Hindi) 

सफ़ेद दाग़ की सबसे बड़ी जटिलता ये है कि इसे हमारे समाज में एक बुरी चीज़ समझा जाता है। लोग सफ़ेद दाग़ को कोढ़ समझते हैं और इसलिए ग़लत इलाज कराने लग जाते हैं। साथ ही बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि ये कभी भी ना ठीक होने वाली बीमारी है जबकि ये सही नहीं है। दूसरी बड़ी मुश्किल की बात करें तो इसका इलाज एक लंबी चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें ठीक होने में या सुधार आने में काफ़ी वक्त लगता है लेकिन कई मरीज़ ऐसे हैं जो इसमें धैर्य से काम नहीं लेते। विटिलिगो कई बार स्टेबल और अनस्टेबल भी होता है। स्टेबल विटिलिगो में दाग़ ना तो घटता है और ना ही बढ़ता है जबकि अनस्टेबल विटिलिगो में कई बार दवाईयां खाने पर दाग़ मिटने के बाद फिर से आ जाते हैं या कभी कभी और ज्यादा बढ़ जाते हैं। ऐसे में मरीज़ परेशान होकर धैर्य खो देते हैं और इलाज बंद कर देते हैं। 

क्या खाएं, क्या ना खाएं? (What to eat, what not in Hindi)   

खाने पीने के मामले में भी लोगों में बहुत तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं जैसे कि दूध, मांस, मछली वगैरह खाने से ये रोग बढ़ जाता है लेकिन ये सरासर ग़लत है। किसी भी तरह के भोजन से ना तो सफ़ेद दाग़ होता है और ना ही बढ़ता है इसलिए मरीज़ वो सब कुछ खा सकता है जो उसके लिए फ़ायदेमंद है।   

क्या छूने से फ़ैलता है सफ़ेद दाग़? (Does vitiligo spread due to touch in Hindi)

सफ़ेद दाग़ को लेकर लोगों में सबसे बड़ी भ्रांति ये है कि यह बीमारी मरीज़ को छूने से फैलती है। सफ़ेद दाग़ एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को ना तो छूने से, ना साथ उठने-बैठने और ना ही खाने-पीने से फैलता है इसलिए इसके मरीज़ों को भी दूसरी बीमारी से पीड़ित मरीज़ों की तरह ही देखना चाहिए और सही इलाज कराना चाहिए।  

डिस्कलेमर – सफ़ेद दाग़ (विटिलिगो), इसके लक्षण, कारण, इलाज तथा बचाव पर लिखा गया यह लेख पूर्णत: डॉक्टर देवेश सिंह, त्वचा विशेषज्ञ द्वारा दिए गए साक्षात्कार पर आधारित है।   

Note: This information on vitiligo, in Hindi, is based on an extensive interview with Dr Devesh Singh (Dermatologist) and is aimed at creating awareness. For medical advice, please consult your doctor.