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अपनाएं कुछ अच्छी आदतें, पाएं डाइबीटीज़ और ब्लड प्रेशर से छुटकारा

Himanshu_Srivastava
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर कैसे करे कंट्रोल? | Dr Himanshu Srivastava on Diabetes & Blood Pressure

संतुलित भोजन और अच्छी जीवनशैली से ब्लड प्रेशर और डाइबीटीज़ जैसी बीमारियों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इन बीमारियों को दूर रखने के लिए फैट्स युक्त चीज़ें खाने से बचें और हरी सब्ज़ियों को डाइट में शामिल करें। जानिए क्या है इन बीमारियों का कारण, लक्षण और इलाज।

आजकल डाइबीटीज़ और ब्लड प्रेशर के मरीज़ों की तादाद दुनियाभर में बढ़ती जा रही है। ये दोनों बीमारियां काफ़ी हद तक एक व्यक्ति की जीवनशैली पर निर्भर करती है। अगर हमारी ज़िदगी में तनाव और चिंता कम है, साथ ही अगर हमारा खान-पान अच्छा और संतुलित है तो इन रोगों से बचा जा सकता है। लेकिन क्योंकि आज हर व्यक्ति अपने काम और जीवन को लेकर तनाव में रहता है इसलिए डाइबीटीज़ और बीपी की बीमारी हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है। इसके बारे में अधिक विस्तार से बता रहे हैं डॉक्टर हिमांशु श्रीवास्तव, फिज़िशियन 

क्या होता है डाइबीटीज़? (What is diabetes?) 

बात करें डाइबीटीज़ की जिसे आम बोलचाल की भाषा में शुगर कहा जाता है तो यह बीमारी खून में शुगर की मात्रा ज्यादा बढ़ जाने से होती है। डाइबीटीज़ दो तरह का होता है – टाइप 1 और टाइप 2। टाइप 1 डाइबीटीज़ अधिकत्तर बच्चों में देखने को मिलता है जिसमें मरीज़ बीमारी की शुरुआत में ही कमज़ोर दिखने लगते हैं इसलिए इसकी जांच और इलाज जल्द शुरु कर दिया जाता है। वहीं टाइप 2 डाइबीटीज़ 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को होता है लेकिन इसमें बीमारी का पता शुरु में नहीं चल पाता इसलिए इसकी जांच औऱ इलाज में देर हो जाती है और डाइबीटीज़ रोग पुराना हो जाता है।  

डाइबीटीज़ के लक्षण और इलाज (Symptoms of Diabetes and its Treatment) 

डाइबीटीज़ के रोगियों को भूख और प्यास ज्यादा लगती है। साथ ही बार-बार पेशाब आता है औऱ शरीर में जगह-जगह घाव हो जाते हैं जो जल्दी ठीक नहीं होते। डाइबीटीज़ की जांच में पहले यह पता लगाया जाता है कि यह रोग शरीर को कितना प्रभावित कर चुका है और उसी मुताबिक इलाज किया जाता है। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए शुरु में मरीज़ों को दवाइयां दी जाती हैं और अधिक गंभीर होने पर इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं।  

डाइबीटीज़ को कैसे रोकें? (How to prevent diabetes?) 

शुगर के मरीज़ों को खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें मीठी चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ज़रुरत से ज्यादा मीठा खाने से वह शरीर में फैट्स के रुप में जमा होकर कॉलेस्ट्रॉल बन जाता है और इससे दूसरी बीमारियां भी हो जाती हैं जैसे ब्लड प्रेशर। इसलिए अक्सर ये देखा गया है कि शुगर के रोगियों को कुछ समय बाद बीपी की शिकायत भी हो जाती है। मरीज़ों को शारीरिक गतिविधयां ज्यादा करनी चाहिए जैसे कि तेज़ चलना, लंबी सैर वगैरह।    

किस तरह का रोग है ब्लड प्रेशर? (What kind of disease is blood pressure?) 

हमारे शरीर में दौड़ने वाले खून का एक प्रेशर होता है। सामान्य तौर पर यह 120/80 होता है लेकिन जब यह सामान्य से कम या ज्यादा हो जाए तो इसे ब्लड प्रेशर की बीमारी कहते हैं। कई बार बीपी बढ़ने के लक्षण सामने नहीं आते और इसलिए मरीज़ को उसका पता ही नहीं चलता। लेकिन अगर बीपी बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो मरीज़ों को एंड ऑरगेन डैमेज (End Organ Damage) हो सकता है। साथ ही चक्कर आना, सिर के पिछले हिस्से में दर्द होना इसके कुछ लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में बीपी को कई दिनों तक चेक करते रहना चाहिए। 60 साल से कम उम्र के मरीज़ों का बीपी अगर 135/85 से ज्यादा होता है तो दवाइयां दी जाती हैं। पुरुषों में बीपी की बीमारी महिलाओं के मुक़ाबले ज्यादा देखने को मिलती है। 

निम्न रक्तचाप क्या होता है? (What is low blood pressure?) 

अगर खून की रफ्तार 90/60 है तो यह निम्न रक्तचाप यानि लो बीपी की बीमारी होती है जो अधिकतर महिलाओं में देखने को मिलती है। भारतीय महिलाओं में आमतौर पर 100/70 ब्लड प्रेशर देखने को मिलता है और इसके कोई लक्षण नहीं दिखते। ऐसे में घबराने की ज़रुरत नहीं होती क्योंकि 110/70 बीपी को सामान्य ही समझा जाता है। लेकिन अगर 110/70 बीपी के साथ किसी को बहुत ज्यादा कमज़ोरी और थकान महसूस हो या फिर पहले की तुलना में बीपी में गिरावट आ जाए तो इलाज की ज़रुरत पड़ती है, इसे रिलेटिव हाइपोटेंशन (Relative Hypotension) कहते हैं। निम्न रक्तचाप के मरीज़ों को चीनी-पानी या इलेक्ट्रॉल पाउडर का घोल दिया जाना चाहिए साथ ही सोडियम की मात्रा भी बढ़ा देनी चाहिए। लेकिन अगर फिर भी सुधार ना हो तो जांच करानी चाहिए।  

ब्लड प्रेशर से किस तरह की परेशानी होती है? (What kind of problem is caused by blood pressure?) 

ब्लड प्रेशर ज्यादातर हार्ट, ब्रेन और किडनी को प्रभावित करता है जिससे हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी डैमेज हो सकते हैं। अगर बीपी बहुत दिनों तक बढ़ा हुआ रहे तो आंखों की रैटीना (Retina) ख़राब हो सकती है और मरीज़ को अचानक अंधापन भी हो सकता है। इसके अलावा किडनी की धमनियों में बीमारी हो सकती है। बीपी बढ़ने से पैरों की नसों में खून की रफ्तार कम होने से लिंब क्लॉडिकेशन (Limb Claudication) भी हो सकता है जिसमें पैरों में तेज़ दर्द होता है। 

   

कैसे करें ब्लड प्रेशर की रोकथाम? (How to prevent Blood Pressure?) 

बीपी की रोकथाम के लिए तली-भुनी और वसा युक्त चीज़ों के सेवन से परहेज़ करें। तेल, घी और दूसरी फैट्स युक्त चीज़ें खाने से बचें। हरी सब्ज़ियों को ज्यादा मात्रा में डाइट में शामिल करना चाहिए और नियमित रुप से कसरत करनी चाहिए। ये बीमारी अनुवांशिक भी होती है इसलिए अगर माता-पिता को ये बीमारी है तो और भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। हमेशा बीपी चेक करते रहना चाहिए और दवाइयों का नियमित रुप से सेवन करना चाहिए।  

डिस्क्लेमर – डाइबीटीज़ और ब्लड प्रेशर की बीमारी, इसके लक्षण, कारण, इलाज तथा बचाव पर लिखा गया यह लेख पूर्णत: डॉक्टर हिमांशु श्रीवास्तव (फिज़िशियन) द्वारा दिए गए साक्षात्कार पर आधारित है।    

Note: This information on Diabetes & Blood Pressure, in Hindi, is based on an extensive interview with Dr Himanshu Srivastava(General Physician) and is aimed at creating awareness. For medical advice, please consult your doctor.

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